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दयानन्द एंग्लो-वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय
प्रबंधक का संदेश
दयानन्द एंग्लो-वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय (डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज) आजमगढ़ में आप सभी का स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। स्वामी दयानन्द सरस्वती के मानवतावादी संदेशों को आदर्श मानकर आजमगढ़ जनपद में 1925 ई. में ‘दि आर्य विद्या सभा आजमगढ़’ की स्थापना हुई जिसका पंजीकरण वर्ष 1928-29 में क्रमांक 33 पर हुआ।
दि आर्य विद्या सभा की स्थापना के साथ ही 1925 ई. में दयानन्द स्कूल अपने वर्तमान भवन में प्रारम्भ हुआ। इस महाविद्यालय की स्थापना दि आर्य विद्या सभा आजमगढ़ द्वारा 1957 ई. में हुई। कालान्तर में यह महाविद्यालय उच्च शिक्षा का एक अग्रणी संस्थान बनकर अपनी ज्ञान ज्योति से पूरे पूर्वांचल को आलोकित करने लगा। अपनी स्थापना से ही डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जनपद में अग्रणी स्थान प्राप्त है।
यह कालेज विद्यार्थियों सहित सभी सहभागियों को एक समुचित शैक्षिक वातावरण एवं व्यवस्था का आश्वासन देता है। महाविद्यालय परिवार के प्रत्येक सदस्य परस्पर स्नेह सौहार्द के वातावरण में श्वांस लेते हैं। स्वामी दयानन्द सरस्वती के द्वारा स्थापित मानवीय मूल्यों, समरसता एवं एकरूपता को स्थापित करने की अपनी सनातन परम्परा के प्रति महाविद्यालय वचनबद्ध है।
हमारा यह अथक एवं भगीरथ प्रयास है कि हम इस संस्था के माध्यम से अपने स्थापित एवं सुव्यवस्थित मूल्यों के अनुकूल आपको अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचा सकें एवं एक जिम्मेदार नागरिक के मूल्यों को आप में समाहित कर सकें। मैं आशा करता हूँ कि आप सभी इस सद्भाव और वचनबद्धता के साथ हमसे जुड़ेंगे और अपने मनोबल एवं नैतिक स्तर को ऊंचा रखेंगे, जिससे कोई भी नकारात्मक शक्ति आपके प्रगति के मार्ग में बाधा न बन सके।
